सूरह 57 · जुज़ 27

Al-Hadid · 57:19

وَالَّذِينَ آمَنُوا بِاللَّهِ وَرُسُلِهِ أُولَٰئِكَ هُمُ الصِّدِّيقُونَ ۖ وَالشُّهَدَاءُ عِنْدَ رَبِّهِمْ لَهُمْ أَجْرُهُمْ وَنُورُهُمْ ۖ وَالَّذِينَ كَفَرُوا وَكَذَّبُوا بِآيَاتِنَا أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ الْجَحِيمِ

तथा जो ईमान लाये अल्लाह और उसके रसूलों[1] पर, वही सिद्दीक़ तथा शहीद[2] हैं अपने पालनहार के समीप। उन्हीं के लिए उनका प्रतिफल तथा उनकी दिव्या ज्योति है और जो काफ़िर हो गये और झ़ठलाया हमारी आयतों को, तो वही नारकीय हैं।
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1. अर्थात बिना अन्तर और भेद-भाव किये सभी रसूलों पर ईमान लाये। 2. सिद्दीक़ का अर्थ हैः बड़ा सच्चा। और शहीद का अर्थ गवाह है। (देखियेः सूरह बक़रह, आयतः 143, और सूरह ह़ज्ज, आयतः 78)। शहीद का अर्थ अल्लाह की राह में मारा गया व्यक्ति भी है।

तफ़सीर

जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और बिना किसी भेदभाव के उसके (सभी) रसूलों पर ईमान लाए, वही अपने रब के निकट 'सिद्दीक़' और 'शहीद' हैं। उनके लिए उनका सम्मानित प्रतिफल है जो उन्हीं के लिए तैयार किया गया है, तथा उनके लिए उनका वह प्रकाश है, जो क़ियामत के दिन उनके आगे और उनके दाहिनी ओर चल रहा होगा। और जिन लोगों ने अल्लाह और उसके रसूलों का इनकार किया और हमारे रसूल पर उतारी गई हमारी आयतों को झुठलाया, वही लोग जहन्नम वाले हैं, जो क़ियामत के दिन उसमें दाख़िल होंगे और हमेशा उसी में रहेंगे, उससे कभी बाहर नहीं निकलेंगे।

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