सूरह 52 · जुज़ 27
At-Tur · 52:29
فَذَكِّرْ فَمَا أَنْتَ بِنِعْمَتِ رَبِّكَ بِكَاهِنٍ وَلَا مَجْنُونٍ
तो आप शिक्षा देते रहें। क्योंकि आपके पालनहार की अनुग्रह से न आप काहिन (ज्योतिषि) हैं और न पागल।[1]
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1. जैसा कि वह आप पर यह आरोप लगा कर हताश करना चाहते हैं।
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1. जैसा कि वह आप पर यह आरोप लगा कर हताश करना चाहते हैं।
तफ़सीर
तो (ऐ रसूल!) आप क़ुरआन के द्वारा नसीहत करें। क्योंकि अल्लाह ने आपको जो ईमान और विवेक दिया है, उसके कारण आप न किसी तरह काहिन हैं कि आपके पास कोई मुवक्किल जिन्न है और न ही आप कोई दीवाना हैं।
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