सूरह 50 · जुज़ 26
Qaf · 50:16
وَلَقَدْ خَلَقْنَا الْإِنْسَانَ وَنَعْلَمُ مَا تُوَسْوِسُ بِهِ نَفْسُهُ ۖ وَنَحْنُ أَقْرَبُ إِلَيْهِ مِنْ حَبْلِ الْوَرِيدِ
जबकि हमने ही पैदा किया है मनुष्य को और हम जानते हैं जो विचार आते हैं उसके मन में तथा हम अधिक समीप हैं उससे (उसकी) प्राणनाड़ी[1] से।
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1. अर्थात हम उस के बारे में उस से अधिक जानते हैं।
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1. अर्थात हम उस के बारे में उस से अधिक जानते हैं।
तफ़सीर
निःसंदेह हमने इनसान को पैदा किया और हम उन विचारों और ख़यालों से अवगत हैं, जो उसके दिल में आते हैं। और हम उससे उसके गले की उस नस से भी अधिक क़रीब हैं जो दिल से जुड़ी होती है।
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