सूरह 47 · जुज़ 26

Muhammad · 47:12

إِنَّ اللَّهَ يُدْخِلُ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِنْ تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ ۖ وَالَّذِينَ كَفَرُوا يَتَمَتَّعُونَ وَيَأْكُلُونَ كَمَا تَأْكُلُ الْأَنْعَامُ وَالنَّارُ مَثْوًى لَهُمْ

निःसंदेह अल्लाह प्रवेश देगा उन्हें, जो ईमान लाये तथा सदाचार किये, ऐसे स्वर्गों में, जिनमें नहरें बहती होंगी तथा जो काफ़िर हो गये, वे आनन्द लेते तथा खाते हैं, जैसे[1] पशु खाते हैं और अग्नि उनका आवास (स्थान) है।
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1. अर्थात परलोक से निश्चिन्त संसारिक जीवन ही को सब कुछ समझते हैं।

तफ़सीर

निश्चय अल्लाह उन लोगों को, जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए और अच्छे कर्म किए, ऐसे बागों में दाखिल करेगा, जिनके महलों और पेड़ों के नीचे से नहरें बहती हैं। तथा जिन लोगों ने अल्लाह और उसके रसूल के साथ कुफ़्र किया, वे अपनी इच्छाओं का पालन करके दुनिया में आनंद लेते हैं और उसी तरह खाते हैं, जैसे जानवर खाते हैं। उन्हें केवल अपने पेट और भोग-विलास की परवाह होती है। और क़ियामत के दिन आग ही उनका ठिकाना है जिसमें वे शरण लेंगे।

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