सूरह 47 · जुज़ 26
Muhammad · 47:11
ذَٰلِكَ بِأَنَّ اللَّهَ مَوْلَى الَّذِينَ آمَنُوا وَأَنَّ الْكَافِرِينَ لَا مَوْلَىٰ لَهُمْ
ये इसलिए कि अल्लाह संरक्षक (सहायक) है उनका, जो ईमान लाये और काफ़िरों का कोई संरक्षक (सहायक)[1] नहीं।
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1. उह़ुद के युध्द में जब काफ़िरों ने कहा कि हमारे पास उज़्ज़ा (देवी) है, और तुम्हारे पास उज़्ज़ा नहीं। तो आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कहा। उन का उत्तर इसी आयत से दो। (सह़ीह़ बुख़ारीः 4043)
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1. उह़ुद के युध्द में जब काफ़िरों ने कहा कि हमारे पास उज़्ज़ा (देवी) है, और तुम्हारे पास उज़्ज़ा नहीं। तो आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कहा। उन का उत्तर इसी आयत से दो। (सह़ीह़ बुख़ारीः 4043)
तफ़सीर
दोनों पक्षों के लिए उक्त (अलग-अलग) बदला इस कारण है कि अल्लाह ईमान वालों का मददगार है और काफ़िरों का कोई सहायक नहीं है।
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