सूरह 46 · जुज़ 26

Al-Ahqaf · 46:5

وَمَنْ أَضَلُّ مِمَّنْ يَدْعُو مِنْ دُونِ اللَّهِ مَنْ لَا يَسْتَجِيبُ لَهُ إِلَىٰ يَوْمِ الْقِيَامَةِ وَهُمْ عَنْ دُعَائِهِمْ غَافِلُونَ

तथा उससे अधिक बहका हुआ कौन हो सकता है, जो अल्लाह के सिवा उसे पुकारता हो, जो उसकी प्रार्थना स्वीकार न कर सके, प्रलय तक और वे उसकी प्रार्थना से निश्चेत (अनजान्) हों?

तफ़सीर

उस व्यक्ति से अधिक पथभ्रष्ट कोई नहीं, जो अल्लाह को छोड़कर ऐसी मूर्ति की पूजा करे, जो क़ियामत के दिन तक उसकी प्रार्थना क़बूल नहीं कर सकती। ये मूर्तियाँ जिनकी ये लोग अल्लाह के अलावा पूजा करते हैं, उन्हें लाभ या हानि पहुँचाना तो दूर की बात, अपने उपासकों की प्रार्थना तक से बेखबर हैं।

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