सूरह 46 · जुज़ 26

Al-Ahqaf · 46:4

قُلْ أَرَأَيْتُمْ مَا تَدْعُونَ مِنْ دُونِ اللَّهِ أَرُونِي مَاذَا خَلَقُوا مِنَ الْأَرْضِ أَمْ لَهُمْ شِرْكٌ فِي السَّمَاوَاتِ ۖ ائْتُونِي بِكِتَابٍ مِنْ قَبْلِ هَٰذَا أَوْ أَثَارَةٍ مِنْ عِلْمٍ إِنْ كُنْتُمْ صَادِقِينَ

आप कहें कि भला देखो कि जिसे तुम पुकारते हो अल्लाह के सिवा, तनिक मुझे दिखा दो कि उन्होंने क्या उत्पन्न किया है धरती में से? अथवा उनका कोई साझा है आकाशों में? मेरे पास कोई पुस्तक[1] प्रस्तुत करो इससे पूर्व की अथवा बचा हुआ कुछ[2] ज्ञान, यदि तुम सच्चे हो।
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1. अर्थात यदि तुम्हें मेरी शिक्षा का सत्य होना स्वीकार नहीं तो किसी धर्म की आकाशीय पुस्तक ही से सिध्द कर के दिखा दो कि सत्य की शिक्षा कुछ और है। और यह भी न हो सके तो किसी ज्ञान पर आधारित कथन और रिवायत ही से सिध्द कर दो कि यह शिक्षा पूर्व के नबियों ने नहीं दी है। अर्थ यह है कि जब आकाशों और धरती की रचना अल्लाह ही ने की है तो उस के साथ दूसरों को पूज्य क्यों बनाते हो? 2. अर्थात इस से पहले वाली आकाशीय पुस्तकों का।

तफ़सीर

(ऐ रसूल!) आप सत्य से मुँह फेरने वाले इन मुश्रिकों से कह दें : मुझे अपने उन बुतों के बारे में बताओ, जिनकी तुम अल्लाह के अलावा पूजा करते हो कि उन्होंने धरती के हिस्सों में से क्या बनाया है? क्या उन्होंने कोई पहाड़ बनाया? क्या उन्होंने कोई नहर बनाई? या क्या आकाशों को बनाने में अल्लाह के साथ उनका कोई हिस्सा है? यदि तुम अपने इस दावे में सच्चे हो कि तुम्हारी मूर्तियाँ पूजा के योग्य हैं, तो मेरे पास क़ुरआन से पहले अल्लाह की उतारी हुई कोई किताब या पूर्वजों के छोड़े हुए ज्ञान का अवशेष ले आओ।

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