सूरह 40 · जुज़ 24

Ghafir · 40:83

فَلَمَّا جَاءَتْهُمْ رُسُلُهُمْ بِالْبَيِّنَاتِ فَرِحُوا بِمَا عِنْدَهُمْ مِنَ الْعِلْمِ وَحَاقَ بِهِمْ مَا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ

जब आये उनके पास हमारे रसूल, निशानियाँ लेकर, तो वे इतराने लगे उस ज्ञान पर,[1] जो उनके पास था और घेर लिया उन्हें उसने जिसका वे उपहास कर रहे थे।
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1. अर्थात सत्यविरोधी ज्ञान।

तफ़सीर

फिर जब उनके पास उनके रसूल खुली निशानियाँ लेकर आए, तो उन्होंने झुठला दिया और उसी ज्ञान से चिमटे रहने पर संतुष्ट हो गए, जो उनके पास था और जो रसूलों की शिक्षा के विपरीत था। चुनांचे उनपर वही यातना उतर आई, जिससे उनके रसूल उन्हें सावधान करते, तो वे उसका मज़ाक़ उड़ाने लगते थे।

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