सूरह 40 · जुज़ 24
Ghafir · 40:60
وَقَالَ رَبُّكُمُ ادْعُونِي أَسْتَجِبْ لَكُمْ ۚ إِنَّ الَّذِينَ يَسْتَكْبِرُونَ عَنْ عِبَادَتِي سَيَدْخُلُونَ جَهَنَّمَ دَاخِرِينَ
तथा कहा है तुम्हारे पालनहार ने कि मुझीसे प्रार्थना[1] करो, मैं तुम्हारी प्रार्थना स्वीकार करूँगा। वास्तव में, जो अभिमान (अहंकार) करेंगे मेरी इबादत (वंदना-प्रार्थना) से, तो वे प्रवेश करेंगे नरक में अपमानित होकर।
____________________
1. ह़दीस में है कि प्रार्थना ही वंदना है। फिर आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने यही आयत पढ़ी। (तिर्मिज़ीः 2969) इस ह़दीस की सनद ह़सन है।
____________________
1. ह़दीस में है कि प्रार्थना ही वंदना है। फिर आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने यही आयत पढ़ी। (तिर्मिज़ीः 2969) इस ह़दीस की सनद ह़सन है।
तफ़सीर
और (ऐ लोगो) तुम्हारे पालनहार ने कहा है कि केवल मेरी ही वंदना करो और मुझ ही से माँगो। मैं तुम्हारी पुकार का जवाब दूँगा और तुम्हें क्षमा कर दूँगा तथा तुम पर दया करुँगा। अवश्य जो लोग अकेले मेरी इबादत (प्रार्थना) से अभिमान करेंगे, वे क़ियामत के दिन अपमानित एवं ज़लील होकर जहन्नम में दाख़िल होंगे।
पाठक में खोलें - पूरी सूरह पढ़ें