सूरह 40 · जुज़ 24

Ghafir · 40:56

إِنَّ الَّذِينَ يُجَادِلُونَ فِي آيَاتِ اللَّهِ بِغَيْرِ سُلْطَانٍ أَتَاهُمْ ۙ إِنْ فِي صُدُورِهِمْ إِلَّا كِبْرٌ مَا هُمْ بِبَالِغِيهِ ۚ فَاسْتَعِذْ بِاللَّهِ ۖ إِنَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْبَصِيرُ

वास्तव में, जो झगड़ते हैं अल्लाह की आयतों में, बिना किसी प्रमाण के, जो आया[1] हो उनके पास, तो उनके दिलों में बड़ाई के सिवा कुछ नहीं है, जिस तक वे पहुचने वाले नहीं हैं। अतः, आप अल्लाह की शरण लें। वास्तव में, वही सब कुछ सुनने-जानने वाला है।
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1. अर्थात बिना किसी ऐसे प्रमाण के जो अल्लाह की ओर से आया हो। उन के सब प्रमाण वे हैं जो उन्हों ने अपने पूर्वजों से सीखे हैं। जिन की कोई वास्तविक्ता नहीं है।

तफ़सीर

जो लोग अल्लाह की आयतों के बारे में उन्हें ग़लत साबित करने के प्रयास में, बिना किसी तर्क और प्रमाण के जो अल्लाह की ओर से उनके पास आई हो, झगड़ते हैं, उन्हें इसपर केवल सत्य पर अहंकारी और अभिमानी होने की इच्छा प्रेरित करती है। लेकिन वे सत्य पर ऊँचा और बड़ा बनने की जो इच्छा रखते हैं, उस तक हरगिज़ नहीं पहुँचेंगे। अतः (ऐ रसूल!) आप अल्लाह को मज़बूती से पकड़ लें। निःसंदेह वह अपने बंदों की बातों को सुनने वाला, उनके कर्मों को देखने वाला है। उनमें से कोई चीज़ उससे नहीं छूटती है और वह उन्हें उनपर बदला देगा।

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