सूरह 40 · जुज़ 24
Ghafir · 40:55
فَاصْبِرْ إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ وَاسْتَغْفِرْ لِذَنْبِكَ وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ بِالْعَشِيِّ وَالْإِبْكَارِ
तो (हे नबी!) आप धैर्य रखें। वास्तव में, अल्लाह का वचन[1] सत्य है तथा क्षमा माँगें अपने पाप[2] की तथा पवित्रता का वर्णन करते रहें अपने पालनहार की प्रशंसा के साथ, संध्या और प्रातः।
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1. नबियों की सहायता करने का। 2. अर्थात भूल-चूक की। आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः मैं दिन में 70 बार क्षमा माँगता हूँ। और 70 बार से अधिक तौबा करता हूँ। (सह़ीह़ बुफ़ारीः 6307) जब कि अल्लाह ने आप को निर्दोष (मासूम) बनाया है।
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1. नबियों की सहायता करने का। 2. अर्थात भूल-चूक की। आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः मैं दिन में 70 बार क्षमा माँगता हूँ। और 70 बार से अधिक तौबा करता हूँ। (सह़ीह़ बुफ़ारीः 6307) जब कि अल्लाह ने आप को निर्दोष (मासूम) बनाया है।
तफ़सीर
तो (ऐ रसूल!) आप अपनी जाति के झुठलाने और कष्ट देने पर सब्र करें। निश्चय अल्लाह ने आपको सहायता एवं समर्थन का जो वचन दिया है, वह सत्य है और उसमें कोई संदेह नहीं है। तथा अपने गुनाह की क्षमा याचना करें। और दिन के शुरू एवं अंत में अपने रब की प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता बयान करें।
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