सूरह 40 · जुज़ 24

Ghafir · 40:43

لَا جَرَمَ أَنَّمَا تَدْعُونَنِي إِلَيْهِ لَيْسَ لَهُ دَعْوَةٌ فِي الدُّنْيَا وَلَا فِي الْآخِرَةِ وَأَنَّ مَرَدَّنَا إِلَى اللَّهِ وَأَنَّ الْمُسْرِفِينَ هُمْ أَصْحَابُ النَّارِ

निश्चित है कि तुम जिसकी ओर मूझे बुला[1] रहे हो, वह पुकारने योग्य नहीं है, न लोक में, न परलोक में तथा हमें जाना है अल्लाह ही की ओर तथा वास्तव में, अतिक्रमी ही नारकी हैं।
____________________
1. क्योंकि लोक तथा परलोक में कोई सहायता नही कर सकते। (देखियेः सूरह फ़ातिर, आयतः140, तथा सूरह अह़्क़ाफ़, आयतः 5)

तफ़सीर

सच्ची बात यह है कि तुम मुझे जिसे मानने और जिसकी इबादत करने को कहते हो, वह सचमुच इस लायक है ही नहीं कि उसे दुनिया एवं आख़िरत में पुकारा जाए, और वह पुकारने वाले की बात का जवाब भी नहीं दे सकता, और हम सभी को केवल अल्लाह के पास लौटकर जाना है, और कुफ़्र एवं गुनाह में पड़ने वाले लोग ही जहन्नमी हैं, जो क़ियामत के दिन हर हाल में उसमें दाख़िल होंगे।

पाठक में खोलें - पूरी सूरह पढ़ें

आपकी भाषा में तफ़सीर

अरबी तफ़सीरें

अनुवाद

सुनें