सूरह 40 · जुज़ 24
Ghafir · 40:42
تَدْعُونَنِي لِأَكْفُرَ بِاللَّهِ وَأُشْرِكَ بِهِ مَا لَيْسَ لِي بِهِ عِلْمٌ وَأَنَا أَدْعُوكُمْ إِلَى الْعَزِيزِ الْغَفَّارِ
तुम मुझे बुला रहे हो, ताकि मैं कुफ़्र करूँ अल्लाह के साथ और साझी बनाऊँ उसका उसे, जिसका मुझे कोई ज्ञान नहीं है तथा मैं बुला रहा हूँ तुम्हें, प्रभावशाली, अति क्षमी की ओर।
तफ़सीर
तुम मुझे बातिल की आेर बुला रहे हो, ताकि मैं अल्लाह के साथ कुफ़्र करुँ, तथा उसके साथ ऐसी वस्तु की वंदना करुँ, जिसके वंदना के सही होने का मेरे पास कोई ज्ञान नहीं है। हालाँकि मैं तुम्हें उस अल्लाह पर ईमान लाने की ओर बुला रहा हुँ, जो ऐसा प्रभावशाली है कि कोई उसपर गालिब नहीं आ सकता तथा अपने बंदों को अति क्षमा करने वाला है।
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