सूरह 40 · जुज़ 24
Ghafir · 40:26
وَقَالَ فِرْعَوْنُ ذَرُونِي أَقْتُلْ مُوسَىٰ وَلْيَدْعُ رَبَّهُ ۖ إِنِّي أَخَافُ أَنْ يُبَدِّلَ دِينَكُمْ أَوْ أَنْ يُظْهِرَ فِي الْأَرْضِ الْفَسَادَ
और कहा फ़िरऔन ने (अपने प्रमुखों सेः) मुझे छोड़ो, मैं वध कर दूँ मूसा को और उसे चाहिये कि पुकारे अपने पालनहार को। वास्तव में, मैं डरता हूँ कि वह बदल देगा तुम्हारे धर्म[1] को अथवा पैदा कर देगा इस धरती (मिस्र) में उपद्रव।
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1. अर्थात शिर्क तथा देवी-देवता की पूजा से रोक कर एक अल्लाह की इबादत में लगा देगा। जो उपद्रव तथा अशान्ति का कारण बन जायेगा और देश हमारे हाथ से निकल जायेगा।
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1. अर्थात शिर्क तथा देवी-देवता की पूजा से रोक कर एक अल्लाह की इबादत में लगा देगा। जो उपद्रव तथा अशान्ति का कारण बन जायेगा और देश हमारे हाथ से निकल जायेगा।
तफ़सीर
और फ़िरऔन ने कहा : मुझे मूसा को दंड के तौर पर क़त्ल करने दो। उसे भी चाहिए कि अपने बचाव के लिए अपने पालनहार को पुकारे। मुझे उसके अपने रब को पुकारने की कोई परवाह नहीं है। मुझे इस बात का डर है कि वह तुम्हारे धर्म को बदल देगा या धरती में क़त्ल एवं बिगाड़ के जरिए उपद्रव मचाएगा।
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