सूरह 40 · जुज़ 24

Ghafir · 40:25

فَلَمَّا جَاءَهُمْ بِالْحَقِّ مِنْ عِنْدِنَا قَالُوا اقْتُلُوا أَبْنَاءَ الَّذِينَ آمَنُوا مَعَهُ وَاسْتَحْيُوا نِسَاءَهُمْ ۚ وَمَا كَيْدُ الْكَافِرِينَ إِلَّا فِي ضَلَالٍ

तो जब वह उनके पास सत्य लाया हमारी ओर से, तो सबने कहाः वध कर दो उनके पुत्रों को, जो ईमान लोये हैं उसके साथ तथा जीवित रहने दो उनकी स्त्रियों को और काफ़िरों का षड्यंत्र निष्फल (व्यर्थ) ही हुआ।[1]
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1. अर्थात फ़िरऔन और उस की जाति का। जब मूसा (अलैहिस्सलाम) और उन की जाति बनी इस्राईल को कोई हानि नहीं हुई। इस से उन की शक्ति बढ़ती ही गई यहाँ तक कि वह पवित्र स्थान के स्वामी बन गये।

तफ़सीर

जब मूसा उनके पास अपनी सच्चाई के प्रमाण लेकर आए, तो फ़िरऔन ने कहा : "जो लोग उसपर ईमान लाए हैं, उनके बेटों को मार डालो तथा उनकी स्त्रियों को अपमान के तौर पर बाक़ी रहने दो।" काफ़िरों की, मोमिनों की संख्या कम करने वाली चाल तो ख़त्म होने वाली और बेअसर होने वाली थी ही।

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