सूरह 4 · जुज़ 5
An-Nisa · 4:85
مَنْ يَشْفَعْ شَفَاعَةً حَسَنَةً يَكُنْ لَهُ نَصِيبٌ مِنْهَا ۖ وَمَنْ يَشْفَعْ شَفَاعَةً سَيِّئَةً يَكُنْ لَهُ كِفْلٌ مِنْهَا ۗ وَكَانَ اللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ مُقِيتًا
जो अच्छी अनुशंसा (सिफ़ारिश) करेगा, उसे उसका भाग (प्रतिफल) मिलेगा तथा जो बुरी अनुशंसा (सिफ़ारिश) करेगा, तो उसे भी उसका भाग (कुफल)[1] मिलेगा और अल्लाह प्रत्येक चीज़ का निरीक्षक है।
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1. आयत का भावार्थ यह है कि अच्छाई तथा बुराई में किसी की सहायता करने का भी पुण्य और पाप मिलता है।
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1. आयत का भावार्थ यह है कि अच्छाई तथा बुराई में किसी की सहायता करने का भी पुण्य और पाप मिलता है।
तफ़सीर
जो दूसरों को भलाई पहुँचाने के लिए प्रयास करेगा, उसे उसके सवाब का कुछ हिस्सा प्राप्त होगा तथा जो दूसरों को बुराई पहुँचाने के लिए प्रयास करेगा, उसे उसके पाप का कुछ हिस्सा मिलेगा। अल्लाह मनुष्य के हर कार्य को देख रहा है और उसे उसका बदला देगा। अतः तुममें से जो व्यक्ति किसी भलाई की प्राप्ति का कारण बनेगा, उसे उसका हिस्सा मिलेगा और जो किसी बुराई की प्राप्ति का कारण बनेगा, उसे उसमें से कुछ प्राप्त होगी।
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