सूरह 4 · जुज़ 5
An-Nisa · 4:82
أَفَلَا يَتَدَبَّرُونَ الْقُرْآنَ ۚ وَلَوْ كَانَ مِنْ عِنْدِ غَيْرِ اللَّهِ لَوَجَدُوا فِيهِ اخْتِلَافًا كَثِيرًا
तो क्या वे क़ुर्आन के अर्थों पर सोच-विचार नहीं करते? यदि वे अल्लाह के सिवा दूसरे की ओर से होता, तो उसमें बहुत सी प्रतिकूल (बेमेल) बातें पाते[1]।
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1. अर्थात जो व्यक्ति क़ुर्आन में विचार करेगा, उस पर यह तथ्य खुल जायेगा कि क़ुर्आन अल्लाह की वाणी है।
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1. अर्थात जो व्यक्ति क़ुर्आन में विचार करेगा, उस पर यह तथ्य खुल जायेगा कि क़ुर्आन अल्लाह की वाणी है।
तफ़सीर
ये लोग क़ुरआन पर मनन चिंतन और उसका गहन अध्ययन क्यों नहीं करते, ताकि उनके लिए यह साबित हो जाए उसमें कोई अंतर (असंगति) या गड़बड़ी नहीं है?! और ताकि उन्हें आपके लाए हुए धर्म की सच्चाई पर विश्वास हो जाए। यदि यह (क़ुरआन) अल्लाह सर्वशक्तिमान के अलावा किसी अन्य की ओर से होता, तो वे उसके प्रावधानों में गड़बड़ी और उसके अर्थों में बहुत अंतर (असंगित) पाते।
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