सूरह 4 · जुज़ 5

An-Nisa · 4:64

وَمَا أَرْسَلْنَا مِنْ رَسُولٍ إِلَّا لِيُطَاعَ بِإِذْنِ اللَّهِ ۚ وَلَوْ أَنَّهُمْ إِذْ ظَلَمُوا أَنْفُسَهُمْ جَاءُوكَ فَاسْتَغْفَرُوا اللَّهَ وَاسْتَغْفَرَ لَهُمُ الرَّسُولُ لَوَجَدُوا اللَّهَ تَوَّابًا رَحِيمًا

और हमने जो भी रसूल भेजा, वो इसलिए, ताकि अल्लाह की अनुमति से, उसकी आज्ञा का पालन किया जाये और जब उन लोगों ने अपने ऊपर अत्याचार किया, तो यदि वे आपके पास आते, फिर अल्लाह से क्षमा याचना करते तथा उनके लिए रसूल क्षमा की प्रार्थना करते, तो अल्लाह को अति क्षमाशील दयावान् पाते।

तफ़सीर

हमने जो भी रसूल भेजा, उसका उद्देश्य यह था कि वह अल्लाह की इच्छा और तक़दीर से जिस चीज़ का आदेश दें उसमें उनका पालन किया जाए। और यदि वे लोग, जब उन्होंने पाप करके स्वयं पर अत्याचार किया था, अपने गुनाहों को स्वीकारते और पछतावा व पश्चाताप प्रकट करते हुए आपके जीवन में (ऐ रसूल) आपके पास आ जाते, और अल्लाह से माफी माँगते, और आप भी उनके लिए माफ़ी माँगते, तो वे अवश्य अल्लाह को बहुत तौबा क़बूल करने वाला और अपने ऊपर दयालु पाते।

पाठक में खोलें - पूरी सूरह पढ़ें

आपकी भाषा में तफ़सीर

अरबी तफ़सीरें

अनुवाद

सुनें