सूरह 4 · जुज़ 5
An-Nisa · 4:63
أُولَٰئِكَ الَّذِينَ يَعْلَمُ اللَّهُ مَا فِي قُلُوبِهِمْ فَأَعْرِضْ عَنْهُمْ وَعِظْهُمْ وَقُلْ لَهُمْ فِي أَنْفُسِهِمْ قَوْلًا بَلِيغًا
यही वो लोग हैं, जिनके दिलों के भीतर की बातें अल्लाह जानता है। अतः, आप उन्हें क्षमा कर दें और उनसे ऐसी प्रभावी बात बोलें, जो उनके दिलों में उतर जाये।
तफ़सीर
ये वो लोग हैं जिनके दिलों में छिपे निफ़ाक़ (पाखंड) और बुरे आशय को अल्लाह भली-भाँति जानता है। अतः - ऐ पैग़ंबर - उन्हें उनके हाल पर छोड़ दें और उनकी उपेक्षा करें, तथा उन्हें प्रोत्साहित करते हुए और डराते हुए उनके सामने अल्लाह का हुक्म (फैसला) स्पष्ट कर दें और उनसे ऐसी बात कहें जो उनके दिल की गहराइयों में उतर जाए।
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