Al-Mukhtasar

Az-Zumar · 39:21

أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ أَنْزَلَ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَسَلَكَهُ يَنَابِيعَ فِي الْأَرْضِ ثُمَّ يُخْرِجُ بِهِ زَرْعًا مُخْتَلِفًا أَلْوَانُهُ ثُمَّ يَهِيجُ فَتَرَاهُ مُصْفَرًّا ثُمَّ يَجْعَلُهُ حُطَامًا ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَذِكْرَىٰ لِأُولِي الْأَلْبَابِ

क्या तुमने नहीं देखा[1] कि अल्लाह ने उतारा आकाश से जल? फिर प्रवाहित कर दिये उसके स्रोत धरती में। फिर निकालता है उससे खेतियाँ विभिन्न रंगों की। फिर सूख जाती हैं, तो तुम देखते हो उन्हें पीली, फिर उसे चूर-चूर कर देता है। निश्चय इसमें बड़ी शिक्षा है मतिमानों के लिए।
____________________
1. इस आयत में अल्लाह के एक नियम की ओर संकेत है जो सब में समान रूप से प्रचलित है। अर्थात वर्षा से खेती का उगना और अनेक स्थितियों से गुज़र कर नाश हो जाना। इसे मतिमानों के लिये शिक्षा कहा गया है। क्योंकि मनुष्य की भी यही दशा है। वह शिशु जन्म लेता है फिर युवक और बूढ़ा हो जाता है। और अंततः संसार से चला जाता है।

यह तफ़सीर अरबी में है। इस आयत को अपनी भाषा में पढ़ें: Al-Mukhtasar

إنكم تعلمون بالمشاهدة أن الله أنزل من السماء ماء المطر، فأدخله في عيونٍ ومجارٍ، ثم يخرج بهذا الماء زرعًا مختلف الألوان، ثم ييبس الزرع، فتراه - أيها المشاهد - مُصْفَرّ اللون بعد أن كان مُخْضَرًّا، ثم يجعله بعد يبسه متكسِّرًا متهشمًا، إن في ذلك المذكور لتذكيرًا لأصحاب القلوب الحية.

39:21 · Al-Mukhtasar

आपकी भाषा में तफ़सीर

अरबी तफ़सीरें

अनुवाद

सुनें

Al-Mukhtasar - Az-Zumar 39:21 · Tlawati