सूरह 34 · जुज़ 22
Saba · 34:5
وَالَّذِينَ سَعَوْا فِي آيَاتِنَا مُعَاجِزِينَ أُولَٰئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ مِنْ رِجْزٍ أَلِيمٌ
तथा जिन्होंने प्रयत्न किये हमारी आयतों में विवश[1] करने का, तो यही हैं, जिनके लिए यातना है अति घोर दुःखदायी।
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1. अर्थात हमारी आयतों से रोकते हैं और समझते हैं कि हम उन को पकड़ने से विवश होंगे।
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1. अर्थात हमारी आयतों से रोकते हैं और समझते हैं कि हम उन को पकड़ने से विवश होंगे।
तफ़सीर
तथा जिन लोगों ने अल्लाह की उतारी हुई आयतों को ग़लत ठहराने के लिए कड़ी मेहनत की। चुनाँचे उन्होंने उसके बारे में कहा कि वह जादू है, तथा हमारे रसूल को काहिन (भविष्यवक्ता), जादूगर और कवि कहा। उन गुणों से विशिष्ट ये लोग क़ियामत के दिन सबसे बुरी और सबसे कठोर सज़ा भुगतेंगे।
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