सूरह 34 · जुज़ 22
Saba · 34:19
فَقَالُوا رَبَّنَا بَاعِدْ بَيْنَ أَسْفَارِنَا وَظَلَمُوا أَنْفُسَهُمْ فَجَعَلْنَاهُمْ أَحَادِيثَ وَمَزَّقْنَاهُمْ كُلَّ مُمَزَّقٍ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِكُلِّ صَبَّارٍ شَكُورٍ
तो उन्होंने कहाः हे हमारे पालनहार! दूरी[1] करदे हमारी यात्राओं के बीच तथा उन्होंने अत्याचार किया अपने ऊपर। अन्ततः, हमने उन्हें कहानियाँ[2] बना दिया और तित्तर-वित्तर कर दिया। वास्तव में, इसमें कई निशानियाँ (शिक्षायें) हैं प्रत्येक अति धैर्यवान, कृतज्ञ के लिए।
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1. हमारी यात्रा के बीच कोई बस्ती न हो। 2. उन की कथायें रह गईं, और उन का अस्तित्व नहीं रह गया।
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1. हमारी यात्रा के बीच कोई बस्ती न हो। 2. उन की कथायें रह गईं, और उन का अस्तित्व नहीं रह गया।
तफ़सीर
उन्होंने यात्रा के दौरान दूरियों को कम करने की अपने ऊपर अल्लाह की नेमत को ठुकरा दिया और कहने लगे : ऐ हमारे पालनहार! इन बस्तियों को हटाकर हमारी यात्राओं के बीच दूरी पैदा कर दे; ताकि हम यात्राओं की थकान का स्वाद ले सकें और हमारी सवारियों की विशिष्टता प्रकट हो सके। उन्होंने अल्लाह की नेमत को ठुकराकर, उसके प्रति आभार प्रकट करने से मुँह फेरकर और अपने बीच गरीबों से ईर्ष्या करके स्वयं पर अत्याचार किया। अतः हमने उन्हें क़िस्से-कहानियाँ बनाकर छोड़ दिया कि बाद में आने वाले उनके बारे में बातें करें। और हमने उन्हें विभिन्न देशों में इस तरह विभाजित कर दिया कि वे एक दूसरे के साथ संवाद न कर सकें। निःसंदेह उपर्युक्त कहानी (सबा वालों को नेमत प्रदान करने और फिर उनकी कृतघ्नता और अहंकार के कारण उनसे प्रतिशोध लेने) में हर उस व्यक्ति के लिए शिक्षा (इबरत) है, जो अल्लाह की आज्ञाकारिता करने पर, उसकी अवज्ञा से बचने में तथा विपत्ति पर बहुत धैर्य से काम लेने वाला तथा अपने ऊपर अल्लाह की नेमतों के प्रति बहुत कृतज्ञ है।
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