सूरह 34 · जुज़ 22
Saba · 34:15
لَقَدْ كَانَ لِسَبَإٍ فِي مَسْكَنِهِمْ آيَةٌ ۖ جَنَّتَانِ عَنْ يَمِينٍ وَشِمَالٍ ۖ كُلُوا مِنْ رِزْقِ رَبِّكُمْ وَاشْكُرُوا لَهُ ۚ بَلْدَةٌ طَيِّبَةٌ وَرَبٌّ غَفُورٌ
सबा[1] की जाति के लिए उनकी बस्तियों में एक निशानी[2] थीः बाग़ थे दायें और बायें। खाओ अपने पालनहार का दिया हुआ और उसके कृतज्ञ रहो। स्वच्छ नगर है तथा अति क्षमि पालनहार।
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1. यह जाति यमन में निवास करती थी। 2. अर्थात अल्लाह के सामर्थ्य की।
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1. यह जाति यमन में निवास करती थी। 2. अर्थात अल्लाह के सामर्थ्य की।
तफ़सीर
सबा जाति के लोगों के लिए उनके उस निवास-स्थान में जिसमें वे रहते थे, अल्लाह की शक्ति और उनपर उसके अनुग्रह की एक स्पष्ट निशानी थी। वह निशानी दो बाग़ थे : उनमें से एक उसके दाईं ओर था और दूसरा उसके बाईं ओर। तथा हमने उनसे कहा था : तुम अपने पालनहार की रोज़ी में से खाओ और उसकी नेमतों पर उसका शुक्रिया अदा करो। यह एक अच्छा नगर है और यह अल्लाह अति क्षमाशील पालनहार है, जो तौबा करने वाले लोगों के पापों को माफ़ कर देता है।
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