सूरह 32 · जुज़ 21
As-Sajdah · 32:29
قُلْ يَوْمَ الْفَتْحِ لَا يَنْفَعُ الَّذِينَ كَفَرُوا إِيمَانُهُمْ وَلَا هُمْ يُنْظَرُونَ
आप कह दें: निर्णय के दिन लाभ नहीं देगा काफ़िरों को, उनका ईमान लाना[1] और न उन्हें अवसर दिया जायेगा।
____________________
1. इन आयतों में मक्का के काफ़िरों को सावधान किया गया है कि इतिहास से शिक्षा ग्रहण करो, जिस जाति ने भी अल्लाह के रसूलों का विरोध किया उस को संसार से निरस्त कर दिया गया। तुम निर्णय की माँग करते हो तो जब निर्णय का दिन आ जायेगा तो तुम्हारे संभाले नहीं संभलेगी और उस समय का ईमान कोई लाभ नहीं देगा।
____________________
1. इन आयतों में मक्का के काफ़िरों को सावधान किया गया है कि इतिहास से शिक्षा ग्रहण करो, जिस जाति ने भी अल्लाह के रसूलों का विरोध किया उस को संसार से निरस्त कर दिया गया। तुम निर्णय की माँग करते हो तो जब निर्णय का दिन आ जायेगा तो तुम्हारे संभाले नहीं संभलेगी और उस समय का ईमान कोई लाभ नहीं देगा।
तफ़सीर
(ऐ रसूल) उनसे कह दें : यह वादा, क़ियामत का दिन है। वही बंदों के बीच निर्णय का दिन है, जब इस दुनिया में अल्लाह का इनकार करने वालों को, क़ियामत के दिन को अपनी आँखों से देख लेने के बाद, उनका विश्वास करना कोई लाभ नहीं देगा। और न ही उन्हें मोहलत दी जाएगी कि वे अपने पालनहार से तौबा कर लें ओर उसकी ओर लौट आएँ।
पाठक में खोलें - पूरी सूरह पढ़ें