सूरह 32 · जुज़ 21
As-Sajdah · 32:17
فَلَا تَعْلَمُ نَفْسٌ مَا أُخْفِيَ لَهُمْ مِنْ قُرَّةِ أَعْيُنٍ جَزَاءً بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
तो नहीं जानता कोई प्राणी उसे, जो हमने छुपा रखा है उनके लिए आँखों की ठण्डक[1] उसके प्रतिफल में, जो वह कर रहे थे।
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1. ह़दीस में है कि अल्लाह ने कहा है कि मैं ने अपने सदाचारी भक्तों के लिये ऐसी चीज़ें तैयार की हैं जिन्हें न किसी आँख ने देखा है और न किसी कान ने सुना है और न किसी मनुष्य के दिल में उन का विचार आया। फिर आप ने यही आयत पढ़ी। (सह़ीह़ बुख़ारीः4780)
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1. ह़दीस में है कि अल्लाह ने कहा है कि मैं ने अपने सदाचारी भक्तों के लिये ऐसी चीज़ें तैयार की हैं जिन्हें न किसी आँख ने देखा है और न किसी कान ने सुना है और न किसी मनुष्य के दिल में उन का विचार आया। फिर आप ने यही आयत पढ़ी। (सह़ीह़ बुख़ारीः4780)
तफ़सीर
कोई व्यक्ति यह नहीं जानता कि अल्लाह ने उनके लिए, उन नेक कामों के बदले के रूप में, जो वे दुनिया में किया करते थे, उनकी आँखों की ठंढक के लिए क्या कुछ तैयार कर रखा है। क्योंकि यह इतना बड़ा बदला है कि अल्लाह के सिवा कोई भी उसे अपने ज्ञान के घेरे में नहीं ला सकता।
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