सूरह 31 · जुज़ 21
Luqman · 31:29
أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ يُولِجُ اللَّيْلَ فِي النَّهَارِ وَيُولِجُ النَّهَارَ فِي اللَّيْلِ وَسَخَّرَ الشَّمْسَ وَالْقَمَرَ كُلٌّ يَجْرِي إِلَىٰ أَجَلٍ مُسَمًّى وَأَنَّ اللَّهَ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرٌ
क्या तुमने नहीं देखा कि अल्लाह मिला[1] देता है, रात्रि को दिनमें और मिला देता है दिन को[2] रात्रि में तथा वश में कर रखा है सूर्य तथा चाँद को, प्रत्येक चल रहा है एक निर्धारित समय तक और अल्लाह उससे, जो तुम कर रहे हो भली-भाँति अवगत है।
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1. क़ुर्आन ने एकेश्वरवाद का आमंत्रण देने तथा मिश्रणवाद का खण्डन करने के लिये फिर इस का वर्णन किया है कि जब विश्व का रचयिता तथा विधाता अल्लाह ही है तो पूज्य भी वही है, फिर भी यह विश्वव्यापि कुपथ है कि लोग अल्लाह के सिवा अन्य की पूजा करते तथा सूर्य और चाँद को सज्दा करते हैं, निर्धारित समय से अभिप्राय प्रलय है। 2. तो कभी दिन बड़ा होता है तो कभी रात्रि।
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1. क़ुर्आन ने एकेश्वरवाद का आमंत्रण देने तथा मिश्रणवाद का खण्डन करने के लिये फिर इस का वर्णन किया है कि जब विश्व का रचयिता तथा विधाता अल्लाह ही है तो पूज्य भी वही है, फिर भी यह विश्वव्यापि कुपथ है कि लोग अल्लाह के सिवा अन्य की पूजा करते तथा सूर्य और चाँद को सज्दा करते हैं, निर्धारित समय से अभिप्राय प्रलय है। 2. तो कभी दिन बड़ा होता है तो कभी रात्रि।
तफ़सीर
क्या तुमने नहीं देखा कि अल्लाह दिन को बढ़ाने के लिए रात को कम करता है, और दिन से घटाकर रात को बढ़ाता है, तथा उसने सूर्य और चंद्रमा के मार्ग निर्धारित कर दिए; क्योंकि प्रत्येक एक निर्दिष्ट अवधि तक अपनी कक्षा में आगे बढ़ता है। और यह कि अल्लाह तुम्हारे कर्मों से पूरी तरह सूचित है, उससे तुम्हारा कोई काम छिपा नहीं है और वह तुम्हें उनका बदला देगा।
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