सूरह 31 · जुज़ 21
Luqman · 31:27
وَلَوْ أَنَّمَا فِي الْأَرْضِ مِنْ شَجَرَةٍ أَقْلَامٌ وَالْبَحْرُ يَمُدُّهُ مِنْ بَعْدِهِ سَبْعَةُ أَبْحُرٍ مَا نَفِدَتْ كَلِمَاتُ اللَّهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٌ
और यदि जो भी धरती में वृक्ष हैं, सब लेखनियाँ बन जायें तथा उसके पश्चात् सागर स्याही हो जायें सात सागरों तक, तो भी समाप्त नहीं होंगे अल्लाह (की प्रशंसा) के शब्द, वास्तव में, अल्लाह प्रभावशाली, गुणी है।
तफ़सीर
अगर धरती के ऊपर जितने पेड़ हैं, सबको काटकर क़लम बना लिया जाए और समुद्र को इसके लिए स्याही बना दिया जाए, भले ही उसमें सात समुद्र और बढ़ा दिए जाएँ, तो अल्लाह के शब्द समाप्त नहीं होंगे, क्योंकि वे अनंत हैं। निःसंदेह अल्लाह अत्यंत प्रभुत्वशाली है, उसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता, वह अपनी रचना और प्रबंधन में हिकमत वाला है।
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