सूरह 30 · जुज़ 21

Ar-Rum · 30:43

فَأَقِمْ وَجْهَكَ لِلدِّينِ الْقَيِّمِ مِنْ قَبْلِ أَنْ يَأْتِيَ يَوْمٌ لَا مَرَدَّ لَهُ مِنَ اللَّهِ ۖ يَوْمَئِذٍ يَصَّدَّعُونَ

अतः, आप सीधा रखें अपना मुख सत्धर्म की दिशा में, इससे पहले कि आ जाये वह दिन, जिसे फिरना नहीं है अल्लाह की ओर से, उस दिन लोग अलग-अलग हो[1] जायेंगे।
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1. अर्थात ईमान वाले और काफ़िर।

तफ़सीर

(ऐ रसूल) आप अपना चेहरा सीधे घर्म इस्लाम पर स्थापित रखें, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं है, इससे पहले कि क़ियामत का दिन आ जाए, जिसके आ जाने पर, उसे कोई टालने वाला नहीं होगा। उस दिन लोग अलग-अलग समूहों में होंगे : एक समूह जन्नत के अंदर नेमतों में होगा, और एक समूह जहन्नम के अंदर अज़ाब में ग्रस्त होगा।

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