सूरह 30 · जुज़ 21
Ar-Rum · 30:25
وَمِنْ آيَاتِهِ أَنْ تَقُومَ السَّمَاءُ وَالْأَرْضُ بِأَمْرِهِ ۚ ثُمَّ إِذَا دَعَاكُمْ دَعْوَةً مِنَ الْأَرْضِ إِذَا أَنْتُمْ تَخْرُجُونَ
और उसकी निशानियों में से है कि स्थापित हैं आकाश तथा धरती उसके आदेश से। फिर जब तुम्हें पुकारेगा एक बार धरती से, तो सहसा तुम निकल पड़ोगे।
तफ़सीर
और अल्लाह की उसकी शक्ति और एकता को दर्शाने वाली निशानियों में से आकाश का बिने गिरे और धरती का बिना ध्वस्त हुए; उस महिमावान के आदेश से स्थापित होना है। फिर जब वह तुम्हें फ़रिश्ते के सूर में फूँकने के द्वारा धरती से बुलाएगा, तो अचानक तुम हिसाब और बदले के लिए अपनी क़ब्रों से निकल पड़ोगे।
पाठक में खोलें - पूरी सूरह पढ़ें