सूरह 3 · जुज़ 4
Ali 'Imran · 3:97
فِيهِ آيَاتٌ بَيِّنَاتٌ مَقَامُ إِبْرَاهِيمَ ۖ وَمَنْ دَخَلَهُ كَانَ آمِنًا ۗ وَلِلَّهِ عَلَى النَّاسِ حِجُّ الْبَيْتِ مَنِ اسْتَطَاعَ إِلَيْهِ سَبِيلًا ۚ وَمَنْ كَفَرَ فَإِنَّ اللَّهَ غَنِيٌّ عَنِ الْعَالَمِينَ
उसमें खुली निशानियाँ हैं, (जिनमें) मक़ामे[1] इब्राहीम है तथा जो कोई उस (की सीमा) में प्रवेश कर गया, तो वह शांत (सुरक्षित) हो गया। तथा अल्लाह के लिए लोगों पर इस घर का ह़ज अनिवार्य है, जो उसतक राह पा सकता हो तथा जो कुफ़्र करेगा, तो अल्लाह संसार वासियों से निस्पृह है।
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1. अर्थात वह पत्थर जिस पर खड़े हो कर इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने काबा का निर्माण किया जिस पर उन के पैरों के निशान आज तक हैं।
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1. अर्थात वह पत्थर जिस पर खड़े हो कर इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने काबा का निर्माण किया जिस पर उन के पैरों के निशान आज तक हैं।
तफ़सीर
इस घर के अंदर उसके सम्मान एवं प्रतिष्ठा की स्पष्ट निशानियाँ हैं, जैसे हज्ज के कार्य और उसके निर्धारित स्थान। इन निशानियों में से एक वह पत्थर भी है, जिसपर इबराहीम अलैहिस्सलाम उस समय खड़े हुए थे जब उन्होंने काबा की दीवार को उठाना चाहा था। तथा एक निशानी यह भी है कि जो इसमें प्रवेश कर जाए, उससे भय दूर हो जाएगा और उसे कोई नुकसान नहीं पहुँचेगा। तथा अल्लाह के लिए लोगों पर हज्ज के अनुष्ठानों को पूरा करने के लिए इस घर को जाना अनिवार्य है। यह आदेश उनमें से उसके लिए है जो वहाँ तक पहुँचने में सक्षम है। और जिसने हज्ज के अनिवार्य होने का इनकार किया, तो (याद रखो कि) अल्लाह ऐसे काफ़िर से तथा समस्त संसार वालों से निस्पृह है।
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