सूरह 3 · जुज़ 3
Ali 'Imran · 3:84
قُلْ آمَنَّا بِاللَّهِ وَمَا أُنْزِلَ عَلَيْنَا وَمَا أُنْزِلَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَإِسْمَاعِيلَ وَإِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ وَالْأَسْبَاطِ وَمَا أُوتِيَ مُوسَىٰ وَعِيسَىٰ وَالنَّبِيُّونَ مِنْ رَبِّهِمْ لَا نُفَرِّقُ بَيْنَ أَحَدٍ مِنْهُمْ وَنَحْنُ لَهُ مُسْلِمُونَ
(हे नबी!) आप कहें कि हम अल्लाह पर तथा जो हमपर उतारा गया और जो इब्राहीम, इस्माईल, इस्ह़ाक़, याक़ूब एवं (उनकी) संतानों पर उतारा गया तथा जो मूसा, ईसा तथा अन्य नबियों को उनके पालनहार की ओर से प्रदान किया गया है, (उनपर) ईमान लाये। हम उन (नबियों) में किसी के बीच कोई अंतर नहीं[1] करते और हम उसी (अल्लाह) के आज्ञाकारी हैं।
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1. अर्थात मूल धर्म अल्लाह की आज्ञाकारिता है, और अल्लाह की पुस्तकों तथा उस के नबियों के बीच अन्तर करना, किसी को मानना और किसी को न मानना अल्लाह पर ईमान और उस की आज्ञाकारिता के विपरीत है।
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1. अर्थात मूल धर्म अल्लाह की आज्ञाकारिता है, और अल्लाह की पुस्तकों तथा उस के नबियों के बीच अन्तर करना, किसी को मानना और किसी को न मानना अल्लाह पर ईमान और उस की आज्ञाकारिता के विपरीत है।
तफ़सीर
(ऐ रसूल!) आप कह दें : हम अल्लाह पर उसे मा'बूद (पूज्य) मानते हुए ईमान लाए तथा उसने हमें जो कुछ आदेश दिया, हमने उसका पालन किया, और हम उस वह़्य पर ईमान लाए, जो उसने हमपर उतारी, और उसपर जो उसने इबराहीम, इसमाईल, इसहाक़ और या'क़ूब पर उतारा, तथा उसपर जो उसने याक़ूब अलैहिस्सलाम की संतान में से होने वाले नबियों पर उतारा, तथा उसपर जो मूसा, ईसा और सारे नबियों को उनके पालनहार की ओर से पुस्तकें और निशानियाँ दी गईं। हम उनके बीच अंतर (भेदभाव) नहीं करते, कि हम कुछ पर ईमान लाएँ और कुछ का इनकार कर दें। तथा हम अकेले अल्लाह ही के आज्ञाकारी और उसी के सामने झुकने वाले हैं।
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