सूरह 3 · जुज़ 3

Ali 'Imran · 3:83

أَفَغَيْرَ دِينِ اللَّهِ يَبْغُونَ وَلَهُ أَسْلَمَ مَنْ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ طَوْعًا وَكَرْهًا وَإِلَيْهِ يُرْجَعُونَ

तो क्या वे अल्लाह के धर्म (इस्लाम) के सिवा (कोई दूसरा धर्म) खोज रहे हैं? जबकि जो आकाशों तथा धरती में है, स्वेच्छा तथा अनिच्छा उसी के आज्ञाकारी[1] हैं तथा सब उसी की ओर फेरे[2] जायेंगे।
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1. अर्थात उसी की आज्ञा तथा व्यवस्था के अधीन हैं। फिर तुम्हें इस स्वभाविक धर्म से इंकार क्यों है? 2. अर्थात प्रलय के दिन अपने कर्मों के प्रतिफल के लिये।

तफ़सीर

क्या अल्लाह के धर्म और उसकी आज्ञाकारिता से निकल जाने वाले ये लोग अल्लाह के उस धर्म के अलावा जिसे अल्लाह ने अपने बंदो के लिए चुन लिया है - जो कि इस्लाम है - कोई अन्य धर्म तलाश करते हैं?! हालाँकि आकाशों और धरती के सभी प्राणियों ने उसके सामने आत्मसमर्पण कर दिया और उसके आज्ञाकारी हो गए, चाहे मोमिनों की तरह स्वेच्छा से हो, और चाहे काफ़िरों की तरह अनिच्छा से हो। फिर क़ियामत के दिन सभी प्राणियों को हिसाब और बदले के लिए अल्लाह ही की ओर लौटकर जाना है।

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