सूरह 3 · जुज़ 3

Ali 'Imran · 3:71

يَا أَهْلَ الْكِتَابِ لِمَ تَلْبِسُونَ الْحَقَّ بِالْبَاطِلِ وَتَكْتُمُونَ الْحَقَّ وَأَنْتُمْ تَعْلَمُونَ

हे अह्ले किताब! क्यों सत्य को असत्य के साथ मिलाकर संदिग्ध कर देते हो और सत्य को छुपाते हो, जबकि तुम जानते हो?

तफ़सीर

ऐ किताब वालो! तुम अपनी किताबों में उतारी गई सच्चाई को अपने पास से झूठ के साथ क्यों गड्डमड्ड करते हो, तथा जो कुछ उनमें सच्चाई और मार्गदर्शन है उन्हें छिपाते हो, जिनमें मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के सच्चे नबी होने की बात भी शामिल है, जबकि तुम सत्य को असत्य से और मार्गदर्शन को पथभ्रष्टता से जानते हो?!

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