सूरह 23 · जुज़ 18
Al-Mu'minun · 23:66
قَدْ كَانَتْ آيَاتِي تُتْلَىٰ عَلَيْكُمْ فَكُنْتُمْ عَلَىٰ أَعْقَابِكُمْ تَنْكِصُونَ
मेरी आयतें तुम्हें सुनायी जाती रहीं, तो तुम एड़ियों के बल फिरते रहे।
तफ़सीर
दुनिया में अल्लाह की किताब की आयतें तुम्हें सुनाई जाती थीं, तो तुम उन्हें सुनकर उनसे घृणा के कारण मुँह फेरते हुए पलट जाते थे।
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