सूरह 18 · जुज़ 15
Al-Kahf · 18:54
وَلَقَدْ صَرَّفْنَا فِي هَٰذَا الْقُرْآنِ لِلنَّاسِ مِنْ كُلِّ مَثَلٍ ۚ وَكَانَ الْإِنْسَانُ أَكْثَرَ شَيْءٍ جَدَلًا
और हमने इस क़ुर्आन में प्रत्येक उदाहरण से लोगों को समझाया है। और मनुष्य बड़ा ही झगड़ालू है।
तफ़सीर
हमने मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतरने वाले इस क़ुरआन में अनेक प्रकार के बहुत-से उदाहरण प्रस्तुत किए हैं और उन्हें विविधता के साथ बयान किए हैं। ताकि लोग नसीहत और सदुपदेश प्राप्त करें। लेकिन मनुष्य - विशेष रूप से एक काफ़िर - की ओर से जो चीज़ सबसे ज़्यादा सामने आती है, वह ना-हक़ (सच्चाई के बिना) झगड़ना (बहस करना) है।
पाठक में खोलें - पूरी सूरह पढ़ें