सूरह 18 · जुज़ 15
Al-Kahf · 18:18
وَتَحْسَبُهُمْ أَيْقَاظًا وَهُمْ رُقُودٌ ۚ وَنُقَلِّبُهُمْ ذَاتَ الْيَمِينِ وَذَاتَ الشِّمَالِ ۖ وَكَلْبُهُمْ بَاسِطٌ ذِرَاعَيْهِ بِالْوَصِيدِ ۚ لَوِ اطَّلَعْتَ عَلَيْهِمْ لَوَلَّيْتَ مِنْهُمْ فِرَارًا وَلَمُلِئْتَ مِنْهُمْ رُعْبًا
और तुम[1] उन्हें समझोगे कि जाग रहे हैं, जबकि वे सोये हुए हैं और हम उन्हें दायें तथा बायें पार्शव पर फिराते रहते हैं और उनका कुत्ता गुफा के द्वार पर अपनी दोनों बाहें फैलाये पड़ा है। यदि तुम झाँककर देख लेते, तो पीठ फेरकर भाग जाते और उनसे भयपूर्ण हो जाते।
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1. इस में किसी को भी संबोधित माना जा सकता है, जो उन्हें उस दशा में देख सके।
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1. इस में किसी को भी संबोधित माना जा सकता है, जो उन्हें उस दशा में देख सके।
तफ़सीर
और (ऐ उनकी ओर देखने वाले) तुम उनकी आँखें खुली होने के कारण उन्हें जगा हुआ समझते, जबकि वास्तव में वे सोए हुए थे। तथा हम उन्हें उनकी नींद में कभी दाईं करवट और कभी बाईं करवट पलटते रहते थे, ताकि मिट्टी उनके शरीर न खा ले। और उनके साथ जाने वाला कुत्ता गुफा के द्वार पर अपनी बाँहें फैलाए हुए था। यदि आप उन्हें झाँककर देख लेते, तो उनके भय से पीठ फेरकर भाग खड़े होते और आपके दिल में उनका डर भर जाता।
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