सूरह 17 · जुज़ 15
Al-Isra · 17:78
أَقِمِ الصَّلَاةَ لِدُلُوكِ الشَّمْسِ إِلَىٰ غَسَقِ اللَّيْلِ وَقُرْآنَ الْفَجْرِ ۖ إِنَّ قُرْآنَ الْفَجْرِ كَانَ مَشْهُودًا
आप नमाज़ की स्थापना करें, सूर्यास्त से रात के अन्धेरे[1] तक तथा प्रातः (फ़ज्र के समय) क़ुर्आन पढ़िये। वास्तव में, प्रातः क़ुर्आन पढ़ना उपस्थिति का समय[2] है।
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1. अर्थात ज़ुहर, अस्र और मग्रिब तथा इशा की नमाज़। 2. अर्थात फ़ज्र की नमाज़ के समय रात और दिन के फ़रिश्ते एकत्र तथा उपस्थित रहते हैं। (सह़ीह़ बुख़ारीः359, सह़ीह़ मुस्लिमः 632)
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1. अर्थात ज़ुहर, अस्र और मग्रिब तथा इशा की नमाज़। 2. अर्थात फ़ज्र की नमाज़ के समय रात और दिन के फ़रिश्ते एकत्र तथा उपस्थित रहते हैं। (सह़ीह़ बुख़ारीः359, सह़ीह़ मुस्लिमः 632)
तफ़सीर
नमाज़ स्थापित करें, इस प्रकार कि उसे सबसे पूर्ण तरीक़े से उसके नियत समय पर अदा करें; आकाश के बीच से सूर्य के ढलने से, जिसमें ज़ुहर और अस्र की नमाज़ें शामिल हैं, रात के अंधेरे तक, जिसमें मग़रिब और इशा की नमाज़ें शामिल हैं। तथा फ़ज्र की नमाज़ क़ायम करें और उसमें क़ुरआन की तिलावत लंबी करें। क्योंकि फ़ज्र की नमाज़ में रात और दिन के फ़रिश्ते उपस्थित होते हैं।
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