सूरह 17 · जुज़ 15
Al-Isra · 17:69
أَمْ أَمِنْتُمْ أَنْ يُعِيدَكُمْ فِيهِ تَارَةً أُخْرَىٰ فَيُرْسِلَ عَلَيْكُمْ قَاصِفًا مِنَ الرِّيحِ فَيُغْرِقَكُمْ بِمَا كَفَرْتُمْ ۙ ثُمَّ لَا تَجِدُوا لَكُمْ عَلَيْنَا بِهِ تَبِيعًا
या तुम निर्भय हो गये हो कि फिर उस (सागर) में तुम्हें दूसरी बार ले जाये, फिर तुमपर वायु का प्रचण्ड झोंका भेज दे, फिर तुम्हें डुबा दे, उस कुफ़्र के बदले, जो तुमने किया है। फिर तुम अपने लिए उसे नहीं पाओगे, जो हमपर इसका दोष[1] धरे।
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1. और हम से बदले की माँग कर सके।
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1. और हम से बदले की माँग कर सके।
तफ़सीर
या तुम इस बात से निश्चिंत हो गए हो कि वह तुम्हें फिर से समुद्र में वापस ले आए, फिर तुमपर प्रचंड हवा भेजकर तुम्हें डुबो दे, क्योंकि तुमने अल्लाह की उस नेमत की नाशुक्री की, जो उसने तुम्हें पहली बार मुक्ति प्रदान की थी। फिर तुम्हें ऐसा कोई न मिले, जो तुम्हारा समर्थन करते हुए हमसे उसके बारे में कुछ माँग करे जो हमने तुम्हारे साथ किया।
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