सूरह 17 · जुज़ 15
Al-Isra · 17:68
أَفَأَمِنْتُمْ أَنْ يَخْسِفَ بِكُمْ جَانِبَ الْبَرِّ أَوْ يُرْسِلَ عَلَيْكُمْ حَاصِبًا ثُمَّ لَا تَجِدُوا لَكُمْ وَكِيلًا
क्या तुम निर्भय हो गये हो कि अल्लाह तुम्हें थल (धरती) ही में धंसा दे अथवा तुमपर फथरीली आँधी भेज दे? फिर तुम अपना कोई रक्षक न पाओ।
तफ़सीर
(ऐ मुश्रिको) क्या तुम इस बात से निश्चिंत हो गए हो कि जब उसने तुम्हें बचाकर थल तक पहुँचा दिया, तो तुम्हें वहीं धरती में धँसा दे? या तुम इस बात से निश्चिंत हो गए हो कि तुमपर उसी तरह आकाश से पत्थरों की बारिश कर दे, जिस तरह लूत की जाति के साथ किया था। फिर तुम्हें कोई रक्षक न मिले, जो तुम्हारी रक्षा कर सके और न कोई सहायक मिले, जो तुम्हें विनाश से बचा सके।
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