सूरह 14 · जुज़ 13
Ibrahim · 14:42
وَلَا تَحْسَبَنَّ اللَّهَ غَافِلًا عَمَّا يَعْمَلُ الظَّالِمُونَ ۚ إِنَّمَا يُؤَخِّرُهُمْ لِيَوْمٍ تَشْخَصُ فِيهِ الْأَبْصَارُ
और तुम कदापि अल्लाह को, उससे अचेत न समझो, जो अत्याचारी कर रहे हैं! वह तो उन्हें उस[1] दिन के लिए टाल रहा है, जिस जिन आँखें खुली रह जायेँगी।
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1. अर्थात प्रलय के दिन के लिये।
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1. अर्थात प्रलय के दिन के लिये।
तफ़सीर
(ऐ रसूल!) आप हरगिज़ यह न समझें कि यदि अल्लाह अत्याचारियों की यातना को विलंबित कर रहा है, तो वह उनके झुठलाने और अल्लाह के रास्ते से रोकने आदि कार्यों से अनजान है। बल्कि वह उनसे अवगत है। उनमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है। वह केवल उनकी यातना को क़ियामत के दिन तक विलंबित कर रहा है, जिस दिन आँखें, जो कुछ देख रही होंगी उसकी भयावहता के डर से, फटी की फटी रह जाएँगी।
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