सूरह 14 · जुज़ 13

Ibrahim · 14:34

وَآتَاكُمْ مِنْ كُلِّ مَا سَأَلْتُمُوهُ ۚ وَإِنْ تَعُدُّوا نِعْمَتَ اللَّهِ لَا تُحْصُوهَا ۗ إِنَّ الْإِنْسَانَ لَظَلُومٌ كَفَّارٌ

और तुम्हें उससब में से कुछ दिया, जो तुमने माँगा[1] और यदि तुम अल्लाह के पुरस्कारों की गणना करना चाहो, तो भी नहीं कर सकते। वास्तव में, मनुष्य बड़ा अत्याचारी कृतघ्न (ना शुकरा) है।
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1. अर्थात तुम्हारी प्रत्येक प्राकृतिक माँग पूरी की, और तुम्हारे जीवन की आवश्यक्ता के सभी संसाधनों की व्यवस्था कर दी।

तफ़सीर

और उसने तुम्हें उन सब चीज़ों में से प्रदान किया, जो तुमने माँगीं और जो तुमने नहीं माँगीं। यदि तुम अल्लाह की नेमतों की गणना करो, तो उनकी बहुतायत और बहुलता के कारण उनकी गणना नहीं कर सकते। क्योंकि तुम्हारे लिए जो कुछ उल्लेख किया गया है, वे उनके कुछ उदाहरण हैं। निश्चय इनसान अपने आप पर बड़ा अत्याचार करने वाला, अल्लाह सर्वशक्तिमान की नेमतों का बहुत कृतघ्न है।

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