सूरह 11 · जुज़ 12
Hud · 11:74
فَلَمَّا ذَهَبَ عَنْ إِبْرَاهِيمَ الرَّوْعُ وَجَاءَتْهُ الْبُشْرَىٰ يُجَادِلُنَا فِي قَوْمِ لُوطٍ
फिर जब इब्राहीम से भय दूर हो गया और उसे शुभ सूचना मिल गयी, तो वह लूत की जाति के बारे में हमसे आग्रह करने लगा[1]।
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1. अर्थात प्रार्थना करने लगा कि लूत की जाति को और संभलने का अवसर दिया जाये। हो सकता है कि वह ईमान लायें।
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1. अर्थात प्रार्थना करने लगा कि लूत की जाति को और संभलने का अवसर दिया जाये। हो सकता है कि वह ईमान लायें।
तफ़सीर
फिर जब इबराहीम अलैहिस्सलाम अपने अतिथियों के बारे में, जिन्हों ने खाना नहीं खाया था, यह जान गए कि वे फ़रिश्ते हैं और भय दूर हो गया, और उन्हें शुभसूचना मिल गई कि उनके यहाँ इसहाक नामक एक पुत्र पैदा होगा और फिर याकूब का जन्म होगा, तो वह हमारे दूतों से लूत की जाति के संबंध में बहस करने लगे, शायद वे उनकी सज़ा पीछे हटा दें और शायद वे लूत और उनके घर वालों को बचा लें।
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