सूरह 11 · जुज़ 11

Hud · 11:5

أَلَا إِنَّهُمْ يَثْنُونَ صُدُورَهُمْ لِيَسْتَخْفُوا مِنْهُ ۚ أَلَا حِينَ يَسْتَغْشُونَ ثِيَابَهُمْ يَعْلَمُ مَا يُسِرُّونَ وَمَا يُعْلِنُونَ ۚ إِنَّهُ عَلِيمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ

सुनो! ये लोग अपने सीनों को मोड़ते हैं, ताकि उस[1] से छुप जायेँ, सुनो! जिस समय वे अपने कपड़ों से स्वयं को ढाँपते हैं, तबभी वह (अल्लाह) उनके छुपे को जानता है तथा उनके खुले को भी। वास्तव में, वह उसे भी भली-भाँति जानने वाला[2] है, जो सीनों में (भेद) है।
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1. अर्थात अल्लाह से। 2. आयत का भावार्थ यह है कि मिश्रणवादी अपने दिलों में कुफ़्र को यह समझ कर छुपाते हैं कि अल्लाह उसे नहीं जानेगा। जब कि वह उन के खुले छुपे और उन के दिलों के भेदों तक को जानता है।

तफ़सीर

सुन लो! निःसंदेह ये बहुदेववादी अपने सीनों को मोड़ लेते हैं, ताकि वे अपने सीनों में मौजूद संदेह को अल्लाह से छिपा सकें, वे उससे अनभिज्ञ होने के कारण ऐसा करते हैं। सुनो! जब वे अपने सिर को अपने कपड़ों से ढक लेते हैं, तो अल्लाह जानता है जो कुछ वे छिपाते हैं और जो कुछ वे प्रकट करते हैं। निःसंदेह वह सीनों की छिपाई हुई चीज़ों को भी जानता है।

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