सूरह 101 · जुज़ 30

Al-Qari'ah · 101:5

وَتَكُونُ الْجِبَالُ كَالْعِهْنِ الْمَنْفُوشِ

और पर्वत, धुनी हुई ऊन के समान उडेंगे।[1]
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1. (4-5) इन दोनों आयतों में उस स्थिति को दर्शाया गया है जो उस समय लोगों और पर्वतों की होगी।

तफ़सीर

और पहाड़ अपनी चाल और गति के हल्केपन में धुने हुए ऊन की तरह हो जाएँगे।

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