सूरह 10 · जुज़ 11

Yunus · 10:11

۞ وَلَوْ يُعَجِّلُ اللَّهُ لِلنَّاسِ الشَّرَّ اسْتِعْجَالَهُمْ بِالْخَيْرِ لَقُضِيَ إِلَيْهِمْ أَجَلُهُمْ ۖ فَنَذَرُ الَّذِينَ لَا يَرْجُونَ لِقَاءَنَا فِي طُغْيَانِهِمْ يَعْمَهُونَ

और यदि अल्लाह, लोगों को तुरन्त बुराई का (बदला) दे देता, जैसे वे तुरन्त (सांसारिक) भलाई चाहते हैं, तो उनका समय कभी पूरा हो चुका होता! अतः जो (मरने के पश्चात्) हमसे मिलने की आशा नहीं रखते, हम उन्हें, उनके कुकर्मों में बहकते हुए[1] छोड़ देंगे।
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1. आयत का अर्थ यह है कि अल्लाह के दुष्कर्मों का दण्ड देने का नियम यह नहीं है कि तुरन्त संसार ही में उस का कुफल दे दिया जाये। परन्तु दुष्कर्मी का यहाँ अवसर दिया जाता है, अन्यथा उन का समय कभी का पूरा हो चुका होता।

तफ़सीर

यदि पवित्र अल्लाह लोगों के क्रोधित होने पर ख़ुद अपने, अपने बच्चों और अपने धन पर बद-दुआ (शाप) को उसी तरह जल्दी क़बूल कर ले, जिस तरह उनकी भलाई की दुआओं को स्वीकार करता है - तो वे नष्ट हो जाएँ। लेकिन अल्लाह उन्हें ढील देता है। अतः वह उन लोगों को, जो उससे मिलने की प्रतीक्षा नहीं करते (क्योंकि उन्हें न किसी दंड का भय होता है और न सवाब की आशा होती है) हिसाब के दिन के बारे में भ्रमित, चकित और शंकित छोड़ देता है।

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