सूरह 10 · जुज़ 11

Yunus · 10:100

وَمَا كَانَ لِنَفْسٍ أَنْ تُؤْمِنَ إِلَّا بِإِذْنِ اللَّهِ ۚ وَيَجْعَلُ الرِّجْسَ عَلَى الَّذِينَ لَا يَعْقِلُونَ

किसी प्राणी के लिए ये संभव नहीं है कि अल्लाह की अनुमति[1] के बिना ईमान लाये और वह (अल्लाह) मलीनता उनपर डाल देता है, जो बुध्दि का प्रयोग नहीं करते।
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1. अर्थात उस के स्वभाविक नियम के अनुसार जो सोच-विचार से काम लेता है वही ईमान लाता है।

तफ़सीर

किसी भी व्यक्ति के लिए संभव नहीं है कि वह अल्लाह की अनुमति के बिना अपने आप ईमान ले आए। अतः अल्लाह की इच्छा के बिना ईमान नहीं पाया जा सकता। इसलिए आप उनपर अफ़सोस न करें। अल्लाह उन लोगों पर यातना और अपमान डाल देता है, जो उसके प्रमाणों व तर्कों तथा उसके आदेशों और निषेधों को नहीं समझते हैं।

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