الهندية

سورة الأعلى · 87:13

ثُمَّ لَا يَمُوتُ فِيهَا وَلَا يَحْيَىٰ

फिर उसमें न मरेगा, न जीवित रहेगा।[1]
____________________
1. (9-13) इन में बताया गया है कि आप को मात्र इस का प्रचार प्रसार करना है। और इस की सरल राह यह है कि जो सुने और मानने को लिये तैयार हो उसे शिक्षा दी जाये। किसी के पीछे पड़ने की आवश्यक्ता नहीं है। जो हत्भागे हैं वही नहीं सुनेंगे और नरक की यातना के रूप में अपना दुष्परिणाम देखेंगे।