الهندية
سورة محمد · 47:28
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمُ اتَّبَعُوا مَا أَسْخَطَ اللَّهَ وَكَرِهُوا رِضْوَانَهُ فَأَحْبَطَ أَعْمَالَهُمْ
ये इसलिए कि वे चले उस राह पर, जिसने अप्रसन्न कर दिया अल्लाह को तथा उन्होंने बुरा माना उसकी प्रसन्नता को, तो उसने व्यर्थ कर दिया उनके कर्मों को।[1]
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1. आयत में उन के दुष्परिणाम की ओर संकेत है जो इस्लाम के साथ उस के विरोधी नियमों और विधानों को मानते हैं। और युध्द के समय काफ़िरों का साथ देते हैं।
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1. आयत में उन के दुष्परिणाम की ओर संकेत है जो इस्लाम के साथ उस के विरोधी नियमों और विधानों को मानते हैं। और युध्द के समय काफ़िरों का साथ देते हैं।