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Ibrahim · 14:27

يُثَبِّتُ اللَّهُ الَّذِينَ آمَنُوا بِالْقَوْلِ الثَّابِتِ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَفِي الْآخِرَةِ ۖ وَيُضِلُّ اللَّهُ الظَّالِمِينَ ۚ وَيَفْعَلُ اللَّهُ مَا يَشَاءُ

अल्लाह ईमान वालों को स्थिर[1] कथन के सहारे लोक तथा परलोक में स्थिरता प्रदान करता है तथा अत्याचारियों को कुपथ कर देता है और अल्लाह जो चाहता है, करता है।
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1. स्थिर तथा दृढ़ कथन से अभिप्रेत "ला इलाहा इल्लल्लाह" है। (क़ुर्तुबी) बराअ बिन आज़िब रज़ियल्लाहु अन्हु कहते हैं कि आप ने कहाः मुसलमान से जब क़ब्र में प्रश्न किया जाता है, तो वह "ला इलाहा इल्लल्लाह मुह़म्मदुर् रसूलुल्लाह" की गवाही देता है। अर्थात अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं और मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अल्लाह के रसूल हैं। इसी के बारे में यह आयत है। (सह़ीह़ बुख़ारीः 4699)

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