Hindi

Az-Zumar · 39:3

أَلَا لِلَّهِ الدِّينُ الْخَالِصُ ۚ وَالَّذِينَ اتَّخَذُوا مِنْ دُونِهِ أَوْلِيَاءَ مَا نَعْبُدُهُمْ إِلَّا لِيُقَرِّبُونَا إِلَى اللَّهِ زُلْفَىٰ إِنَّ اللَّهَ يَحْكُمُ بَيْنَهُمْ فِي مَا هُمْ فِيهِ يَخْتَلِفُونَ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَا يَهْدِي مَنْ هُوَ كَاذِبٌ كَفَّارٌ

सुन लो! शुध्द धर्म अल्लाह ही के लिए (योग्य) है तथा जिन्होंने बना रखा है अल्लाह के सिवा संरक्षक, वे कहते हैं कि हम तो उनकी वंदना इसलिए करते हैं कि वह समीप कर देंगें हमें अल्लाह[1] से। वास्तव में, अल्लाह ही निर्णय करेगा उनके बीच जिसमें वे विभेद कर रहे हैं। वास्तव में, अल्लाह उसे सुपथ नहीं दर्शाता जो बड़ा मिथ्यावादी, कृतघ्न हो।
____________________
1. मक्का के काफ़िर यह मानते थे कि अल्लाह ही वास्तविक पूज्य है। परन्तु वह यह समझते थे कि उस का दरबार बहुत ऊँचा है इस लिये वह इन पूज्यों को माध्यम बनाते थे। ताकि इन के द्वारा उन की प्रार्थनायें अल्लाह तक पहुँच जायें। यही बात साधारणतः मुश्रिक कहते आये हैं। इन तीन आयतों में उन के इसी कुविचार का खण्डन किया गया है। फिर उन में कुछ ऐसे थे जो समझते थे कि अल्लाह के संतान हैं। कुछ, फ़रिश्तों को अल्लाह की पुत्रियाँ कहते, और कुछ, नबियों (ईसा) को अल्लाह का पुत्र कहते थे। यहाँ इसी का खण्न किया गया है।

Тефсир на вашем језику

Тефсири на арапском

Превод

Слушај